इशराक़: क़ुरआन और हदीस

क़ुरआन और हदीस के हवाले, सुन्नी राय (हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हंबली) और शिया राय (जाफ़री) साथ-साथ।

इशराक़ की नमाज़ का समय

सुन्नी राय (हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हंबली)

  • सहीह मुस्लिम 831, 832 सूरज निकलते समय नमाज़ न पढ़ो जब तक वह ऊँचा न हो जाए, इसीलिए इशराक़ सूर्योदय के लगभग 15 मिनट बाद शुरू होती है।
  • बहुत से उलमा इशराक़ को चाश्त के समय का शुरुआती हिस्सा मानते हैं।

शिया राय (जाफ़री)

  • जाफ़री मसलक में इशराक़ की अलग नमाज़ नहीं है। सूरज ऊँचा होने के बाद मुस्तहब नमाज़ पढ़ी जा सकती है।

इशराक़ की नमाज़ की फ़ज़ीलत

सुन्नी राय (हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हंबली)

  • तिर्मिज़ी 586 जो फ़ज्र जमाअत से पढ़े, फिर सूर्योदय तक बैठकर अल्लाह का ज़िक्र करे, फिर दो रकअत पढ़े, उसे हज और उमरा जैसा सवाब मिलता है। इमाम तिर्मिज़ी ने इसे हसन ग़रीब कहा; कुछ उलमा इसे ज़ईफ़ मानते हैं।

शिया राय (जाफ़री)

  • जाफ़री मसलक में अलग इशराक़ नमाज़ की किसी रिवायत पर भरोसा नहीं किया जाता।

इशराक़ की नमाज़: रकअत

सुन्नी राय (हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हंबली)

  • 2 रकअत, या 4।

शिया राय (जाफ़री)

  • अलग इशराक़ नमाज़ नहीं।

हदीस के नंबर sunnah.com के अनुसार हैं। जाफ़री स्रोत किताब, भाग और अध्याय के नाम से दिए गए हैं।

दूसरी नमाज़ों के हवाले

आख़िरी अपडेट: मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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